"मै तेरा काल "

राजा धर्मद्वज  का कुशध्वज नमक एक धर्मात्मा भाई था.उसका विवाह मालावती नामक युवती से हुआ.धर्मध्वज के भांति कुशध्वज भी भगवती जगदम्बा का अनन्य भक्त था .वह प्रतिदिन उनके मायाबीज मंत्र का जाप करता था.भगवती कि कृपा से कुशध्वज के घर एक सुन्दर कन्या उत्पन्न हुई.वह कन्या महालक्ष्मी का अंश थी .जन्म लेते ही वह कन्या वेद मंत्रो  का उच्चारण करते हुए सुतिकाग्रिः से बहार निकल आई.अतः विद्वानों ने उसका नाम 'वेदवती' रखा.
माता पिता के भांति वेदवती के ह्रदय में भी भक्ति का अथाह सागर उमड़ रहा था. युवा होने पर

किसे प्रणाम


राजा अनमित्र की पत्नी भद्रा ने एक ऐसे दिव्य पुत्र को जन्म दिया, जिसे पूर्व जन्म की सभी घटनाओ का ज्ञान था. इसी कारण वह बालक माता से कुछ अलग थलग रहता था . भद्रा ने उसे रिझाने के अनेक प्रयास किये, किन्तु असफल रही.अंत में क्रोधित होकर उसने बालक को वन में छुड़वा दिया.
                                वन में एक भयंकर राक्षसी  रहती थी .उसे बच्चो का मांस अत्यंत प्रिय था.लेकिन